पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 25
यह वसूली तीन शर्तों में से किसी के भी तहत की जा सकती थी। पहली चाहे पशुओं को अतिचार करते हुए मौके पर ही ज़ब्त किया गया हो या नहीं; दूसरी चाहे पशु अपराध के लिए सिद्धदोष (दोषी पाए गए) व्यक्ति की संपत्ति हों और तीसरी शर्त चाहे अतिचार किए जाने के समय वे पशु दोषी व्यक्ति के भारसाधीन ही क्यों न हों। इस प्रावधान में ब्रिटिश नीति का प्रभाव कठोर और प्रतिशोधात्मक वित्तीय दण्ड थोपने में और न्याय के सिद्धांतों को दरकिनार करके राजस्व वसूली को प्राथमिकता देने में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
