प्रस्तावना
भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। यह केवल एक कानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत के सपनों, संघर्षों और आकांक्षाओं का जीवंत दर्पण है। 26 नवंबर, 1949 को जब संविधान सभा ने इसे अंगीकृत किया और 26 जनवरी, 1950 को जब यह लागू हुआ, तो सदियों की गुलामी के बाद भारत ने अपने भाग्य का लेख खुद अपने हाथों में लिया।
यह संविधान कोई रातोंरात तैयार नहीं हुआ। इसके पीछे अथक परिश्रम था जो 2 वर्ष, 11 माह और 18 दिन तक किया गया था। संविधान सभा की 11 समितियों ने दिन-रात विचार-विमर्श किया। 7,635 प्रस्तावों पर चर्चा हुई, 2,473 संशोधन आए और अंततः 395 अनुच्छेद तथा 8 अनुसूचियाँ स्वीकृत हुईं। डॉ. भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता वाली प्रारूप समिति ने इसे अंतिम आकार दिया, किन्तु इसमें जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, राजेन्द्र प्रसाद, अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर, के. एम. मुंशी, टी. टी. कृष्णमचारी जैसे अनेक महान व्यक्तियों का योगदान था। महिलाओं में हंसा मेहता, दुर्गाबाई देशमुख, अमृत कौर जैसी विभूतियाँ भी शामिल थीं।
यह संविधान विदेशी संविधानों से प्रेरणा लेता अवश्य है जैसे ब्रिटेन से संसदीय प्रणाली, अमेरिका से मौलिक अधिकार, आयरलैंड से नीति-निर्देशक तत्व, कनाडा से संघीय ढांचा, इत्यादि, किन्तु यह पूरी तरह भारतीय मिट्टी की उपज है। यहाँ गाँव की पंचायत से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक, एकता में विविधता का अद्भुत समन्वय है। यह अतीत की विरासत को सम्मान देता है और भविष्य के भारत का खाका खींचता है – जहाँ प्रत्येक नागरिक को गरिमा, समानता और स्वतंत्रता प्राप्त हो।
यह लेख शृंखला उन सभी विवादों पर आधारित हैं जो इस सभा मे किए गए थे। जितना हो सके उतना सरल भाषा मे इस विषय को लिखने का प्रयास किया गया हैं जिससे आम नागरिक भी इस पूरी प्रक्रिया को समझ सके और कैसे हमारे विधान को लिखा गया और किस विषय को किस सदस्य न प्राधान्य दिया यह भी आप समझ सके। नीचे हर लेख की लिंक हैं जिसपर क्लिक कर आप पढ़ सकते हैं।
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जय हिंद!
जय संविधान!
9 दिसंबर 1946 की बैठक:
10 दिसंबर 1946 की बैठक
