१३. सांस्कृतिक पतन और नियम
लज्जा या शर्म मानव स्वभाव का एक प्राकृतिक गुण है जो व्यक्ति को मर्यादा में रखने में मदद करता है। हालांकि, अनुचित सामग्री के अत्यधिक उपयोग के कारण समाज में लज्जा का लोप होता जा रहा है। पहले जिन चीजों को बोलने या देखने में संकोच होता था, वे अब बेझिझक की जा रही हैं। सार्वजनिक शालीनता की परिभाषाएं बदल गई हैं। अनुचितता को अब एक प्रकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता या प्रगतिशील विचारों का लक्षण माना जाने लगा है, जो वास्तव में दिशाहीन करने वाला है।
