Demand of Service Tax is barred by the Limitations: Part 5
Continued from Part 1 Part 2 Part 3 Part 4 18. The remaining issue concerns 4,31,646 rupees that the appellant […]
Demand of Service Tax is barred by the Limitations: Part 5 Read Post »
Continued from Part 1 Part 2 Part 3 Part 4 18. The remaining issue concerns 4,31,646 rupees that the appellant […]
Demand of Service Tax is barred by the Limitations: Part 5 Read Post »
Continued from Part 1 Part 2 Part 3 15. Thus Tribunal find that the demand made in respect of receipts
Demand of Service Tax is barred by the Limitations: Part 4 Read Post »
Continued from Part 1 Part 2 6. The authority found that the appellant’s work orders and bill of quantities (BOQ)
Demand of Service Tax is barred by the Limitations: Part 3 Read Post »
Continued from Part 1 Findings in Impugned order: 1. The tax department ordered the appellant to pay 10,85,842 rupees for
Demand of Service Tax is barred by the Limitations: Part 2 Read Post »
General Information about the case: Name of the Case: Civil Associates vs Allahabad Date of order: 5 December, 2025
Demand of Service Tax is barred by the Limitations: Part 1 Read Post »
मामले की सामान्य जानकारी: मामले का नाम: श्री रंगा रेड्डी बनाम पी सी सी टी- हैदराबाद- जीएसटी आदेश की तिथि:
General information about the case: Name of case: Mr. Ranga Reddy Male vs P C C T- Hyderabad- Gst Date
Service tax on the Government Consultancy Services in Telangana Read Post »
यह विस्तृत विश्लेषण सिद्ध करता है कि 1871 का यह अधिनियम अब अप्रासंगिक और दमनकारी हो चुका है। इसे पूरी तरह निरस्त कर एक ऐसे नए “एकीकृत पशु कल्याण और अतिचार प्रबंधन अधिनियम” की आवश्यकता है जो पशुओं को “राजस्व की वस्तु” नहीं, बल्कि “जीवंत प्राणी” माने, किसानों और पशुपालकों के हितों में संतुलन बनाए एवं भारतीय पंचायती राज और डिजिटल इंडिया की सोच को आत्मसात करे।
मुजरा करने का सिद्धांत कानूनी रूप से सही है क्योंकि यह किसी को दोहरी क्षतिपूर्ति मिलने से रोकता है। हालाँकि, यह प्रावधान औपनिवेशिक व्यवस्था की उस नीति को दर्शाता है जो राजस्व और पैसे के प्रवाह पर पूर्ण नियंत्रण चाहती थी, खासकर तब जब पैसा राज्य के नियंत्रण वाले कोष से बाहर जा रहा हो। यह मुजरा करने की प्रक्रिया गरीब किसान पर यह साबित करने का बोझ डालती थी कि उसे मजिस्ट्रेट से पहले कोई मुआवजा मिला है या नहीं, जिससे सिविल वाद की कार्यवाही और जटिल हो जाती थी।
यह दोनों न्यायालय अक्सर तहसील अथवा जिले के नगर मे ही स्थित रहते थे। इससे न्याय मे देरी की संभावना बढ़ जाती थी। बिना वकील को नियुक्त किए ये मामले सुलझते नहीं थे। ब्रिटिश नीति ने यह सुनिश्चित किया कि वास्तविक क्षतिपूर्ति पाने का रास्ता इतना कठिन हो कि अधिकांश गरीब किसान इसे अपनाने का साहस न करें। यह एक कानूनी प्रावधान था जो केवल धनी ज़मींदारों और संपन्न वर्गों के लिए उपयोगी था जो सिविल मुकदमे का खर्च उठा सकते थे। गोरों ने बड़ी कुटिलता से स्थानीय पंचोंद्वारा विवाद सुलझाने वाली भारतीय व्यवस्था को समाप्त कर प्रदीर्घ न्यायव्यवस्था इस देश पर केवल इसीलिए लागू की, क्यू की वे चाहते ही नहीं थे की भारतीय जनता को सरलता से न्याय मिले।