23.1 मूल प्रावधान
23. प्रतिकर की वसूली – धारा 22 में वर्णित प्रतिकर, जुर्माने और व्यय ऐसे वसूल किए जा सकेंगे मानो वे मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित जुर्मानें हों।
23.2 विश्लेषणात्मक आलोचना
धारा 22 के तहत दोषी व्यक्ति पर मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए प्रतिकर, जुर्माने और अन्य व्यय को उसी प्रकार से वसूल किया जाएगा मानो वे मजिस्ट्रेट द्वारा अपराधिक मामले में अधिरोपित (imposed) किए गए जुर्माने हों। इस प्रावधान द्वारा प्रतिकर की वसूली को आपराधिक जुर्माने की वसूली के समकक्ष बनाना, औपनिवेशिक प्रशासन की कठोर और प्रभावी प्रवर्तन नीति को दर्शाता है। यह सुनिश्चित करता था कि पैसा वसूलने में कोई ढिलाई न बरती जाए। जबकि प्रशासन अवैध ज़ब्ती के दोषी पर इतनी कठोरता से वसूली करता था, वहीं जब अवैध ज़ब्ती से पीड़ित गरीब पशुपालक को न्याय प्राप्त करने की बात आती थी, तो उसे धारा 20 और 21 के तहत कठोर समय सीमा, दूरी और कानूनी औपचारिकता की बाधाओं का सामना करना पड़ता था।
वसूली के लिए मजिस्ट्रेट की आपराधिक शक्ति का उपयोग करने का अर्थ है कि पूरी प्रक्रिया पर जिला स्तर के सर्वोच्च ब्रिटिश अधिकारी का नियंत्रण था। यह नीति स्थानीय स्तर पर विवादों को हल करने के बजाय केंद्रीकृत सरकारी तंत्र के माध्यम से बलपूर्वक प्रवर्तन पर निर्भर करती थी।
23.3 संशोधन हेतु सुझाव
पशु अतिचार अधिनियम, 1871 की धारा 23 पर विश्लेषणात्मक आलोचना यह स्पष्ट करती है कि कैसे अंग्रेजों ने वसूली के मामले में तो “आपराधिक कठोरता” अपनाई, लेकिन न्याय की प्रक्रिया को आम जनता के लिए अत्यंत जटिल और दुर्गम बना दिया। प्रस्तावित एकीकृत पशु अतिचार नियंत्रण, पशु स्वामित्व, पशु कल्याण, क्षतिपूर्ति एवं सामाजिक सुरक्षा अधिनियम के आलोक में, यहाँ विस्तृत सुझाव दिए गए हैं:
1) कलोनीअल नीति का अंत
ब्रिटिश काल में वसूली की यह कठोरता केवल शासन की शक्ति दिखाने के लिए थी। नए अधिनियम में “बलपूर्वक प्रवर्तन” के बजाय “न्यायसंगत उत्तरदायित्व” की नीति अपनानी चाहिए। वसूली का मुख्य उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि पीड़ित पशुपालक की हुई हानि की तुरंत भरपाई करना होना चाहिए। यदि दोषी कोई सरकारी कर्मचारी है, तो वसूली उसके वेतन से सीधे की जानी चाहिए।
2) संविधान के साथ अनुरूपता
यह धारा राज्य की दमनकारी शक्ति का प्रदर्शन करती है। नया कानून अनुच्छेद 21 के तहत न्याय की मानवीय गरिमा को ध्यान में रखे। वसूली की प्रक्रिया इतनी भी क्रूर नहीं होनी चाहिए कि वह किसी के जीवन के अधिकार को संकट में डाल दे, लेकिन साथ ही यह इतनी ढीली भी नहीं होनी चाहिए कि पीड़ित को अपना हक पाने के लिए वर्षों इंतजार करना पड़े।
3) ग्रामीण और शहरी जगहों पर उपयोगिता
शहरी क्षेत्रों में जहाँ डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हैं, वहां दोषी की संपत्ति या बैंक खाते से प्रतिकर की वसूली का प्रावधान होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ नकद की कमी हो सकती है, वहां स्थानीय पंचायत को मध्यस्थ बनाकर वसूली की ऐसी प्रक्रिया अपनानी चाहिए जो सामाजिक और आर्थिक रूप से व्यावहारिक हो।
4) स्थानीय संस्थाओं को इस मामले मे विवाद सुलझाने का अधिकार
वसूली के लिए मजिस्ट्रेट की आपराधिक शक्तियों पर निर्भर रहने के बजाय, स्थानीय ग्राम पंचायत या नगर निकाय को यह अधिकार दिया जाना चाहिए कि वे अपने स्तर पर आदेश का पालन सुनिश्चित करवाएं। स्थानीय निकायों के पास राजस्व वसूली के जो अधिकार हैं, उनका उपयोग इस प्रतिकर को दिलाने के लिए किया जा सकता है। मजिस्ट्रेट अथवा सिवल कोर्ट मे अपील के प्रावधान दिए जा सकते हैं।
5) मध्यस्थम और सुलह अधिनियम, 1996 के अनुसार मामलों के निपटारे के लिए समिति का गठन
यदि दोषी व्यक्ति एक बार में पूरी राशि देने में असमर्थ है, तो सुलह समिति 1996 के अधिनियम के तहत एक “भुगतान योजना” (Payment Plan) तैयार कर सकती है। इससे वसूली की प्रक्रिया विवादरहित होगी और पीड़ित को किश्तों में ही सही, लेकिन अपना पूरा पैसा वापस मिल सकेगा।
6) जब्त पशुओ का कल्याण
वसूली की गई राशि का एक हिस्सा यदि विलंब से प्राप्त होता है, तो उस पर ब्याज लगाया जाना चाहिए। इस ब्याज की राशि का उपयोग पशु के स्वास्थ्य लाभ और उसके पुनर्वास के लिए किया जाना चाहिए। पशु का कल्याण इस पूरी वित्तीय प्रक्रिया का केंद्र होना चाहिए।
7) आवारा पशुओ के टीकाकरण एवं नसबंदी
यदि अवैध जब्ती किसी आवारा पशु की थी और कोई निजी मालिक नहीं है, तो वसूल किया गया प्रतिकर “स्थानीय पशु निधि” में जाना चाहिए। इस धन का उपयोग विशेष रूप से उसी क्षेत्र में आवारा पशुओं के टीकाकरण और नसबंदी के कार्यक्रमों को गति देने के लिए किया जाना चाहिए।
8) आवासीय क्षेत्र मे पाले हुए जानवरों के कारण होने वाले नुकसान एवं हमले के लिए क्षतिपूर्ति
आवासीय क्षेत्रों में यदि कोई पशु मालिक या रसूखदार व्यक्ति प्रतिकर देने में आनाकानी करता है, तो उसके विरुद्ध नागरिक सुविधाओं (जैसे पानी या बिजली का कनेक्शन) पर अस्थाई रोक जैसे आधुनिक प्रशासनिक दबाव का उपयोग किया जा सकता है, ताकि पीड़ित को त्वरित न्याय मिले।
9) पुलिस एवं पशु मित्रों का हस्तक्षेप पशु और जनता की सुरक्षा के लिए
वसूली की प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या उत्पीड़न को रोकने के लिए “पशु मित्रों” की उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए। पुलिस का कार्य केवल आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा, जबकि पशु मित्र यह प्रमाणित करेंगे कि वसूली की प्रक्रिया मानवीय और पारदर्शी है।
10) आधुनिकीकरण
वसूली और भुगतान की पूरी प्रक्रिया को “डिजिटल एस्क्रो अकाउंट” (Digital Escrow Account) के माध्यम से संचालित किया जाना चाहिए। जैसे ही दोषी व्यक्ति राशि जमा करे, वह बिना किसी देरी के सीधे पीड़ित के बैंक खाते में स्थानांतरित हो जानी चाहिए। इसकी रीयल-टाइम ट्रैकिंग पोर्टल पर उपलब्ध होनी चाहिए।
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