पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 16
ब्रिटिश काल में नीलामी की यह प्रक्रिया केवल सरकारी राजस्व की शत-प्रतिशत वसूली सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई थी। इसमें पशुपालक की आजीविका उजड़ने का कोई दुख नहीं था। नए अधिनियम में “राजस्व सर्वोपरि” की इस क्रूर नीति को समाप्त कर “आजीविका संरक्षण” की नीति अपनानी चाहिए। नीलामी केवल तभी की जाए जब पशु का कोई स्वामी न मिले या वह पशु को रखने से लिखित रूप में मना कर दे। किसी भी परिस्थिति में किसान के आय के मुख्य स्रोत को केवल छोटे जुर्माने के लिए नीलाम नहीं किया जाना चाहिए।
