पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 14
ब्रिटिश काल में ‘डौंडी पिटवाकर’ घोषणा करना और मात्र 14 दिनों में पशु बेच देना एक दमनकारी तंत्र था। यह नीति खानाबदोश और गरीब समुदायों को जानबूझकर अपनी संपत्ति से हाथ धोने पर मजबूर करती थी। नए अधिनियम में इस ‘समय-बद्ध लूट’ को समाप्त कर ‘पुनर्वास और स्वामित्व’ की नीति अपनानी चाहिए, जहाँ प्राथमिकता पशु को उसके मालिक तक पहुँचाने की हो, न कि उसे बेचने की। अगर पशुओं के टैग करने की विधि नियमित हो जाती हैं तो यह काम और जल्द हो सकता हैं।
