Administrative Lex

Administrative Lex, Animal Juriprudence, Criminal Lex, Procedural Lex

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 10

3. पुलिस की सुधारात्मक भूमिका: पुलिस केवल तभी हस्तक्षेप करेगी जब पशु के साथ क्रूरता की जा रही हो या जान-माल का खतरा हो। पुलिस का कार्य किसी एक पक्ष को संरक्षण देना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना होगा कि पशु को सुरक्षित और मानवीय तरीके से आश्रय केंद्र तक पहुँचाया जाए। अगर पालतू पशु हिंसक बन गया हो तो भी अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए पुलिस का हस्तक्षेप होना चाहिए।

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Administrative Lex, Animal Juriprudence, Criminal Lex

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 9

2. समय-बद्ध सूचना और मुक्ति: पशु के केंद्र में आने के ६ घंटे के भीतर यदि मालिक की पहचान हो जाती है, तो उसे सूचित किया जाना अनिवार्य होगा। यदि मालिक आर्थिक रूप से असमर्थ है, तो उसे ‘किस्त’ (Installments) में भुगतान करने या सामुदायिक सेवा के बदले पशु ले जाने का विकल्प दिया जाए, ताकि वह अपने आजीविका के साधन से हाथ न धोए।

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Administrative Lex, Animal Juriprudence, Criminal Lex

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 8

1. तत्काल पशु राहत (First Aid and Fodder): किसी भी पशु के केंद्र में प्रवेश करते ही, रिकॉर्ड दर्ज करने से पहले, रखवाला उसे पानी और चारा उपलब्ध कराए। यदि पशु घायल है, तो तुरंत पशु चिकित्सक को सूचित किया जाए। पशु चिकित्सक को भी सूचना मिलते ही जल्द से जल्द पोहोचने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।

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Administrative Lex, Animal Juriprudence, Criminal Lex

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 7

3. सूचना का अधिकार: ब्रिटिश काल में ये रजिस्टर गुप्त रखे जाते थे ताकि पशुपालक को अपनी स्थिति का पता न चले। अब इन सभी रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। अगर पूरी फाइल किसी मामले की चाहिए हो तो उसे सूचना के अधिकार की अर्जी देकर प्राप्त करने के प्रावधान भी लिखे जाने चाहिए।

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पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 6

3. प्रशिक्षण और संवेदीकरण: नियुक्त व्यक्ति को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा का अनिवार्य प्रशिक्षण दिया जाए। उसका लक्ष्य पशुओं को ‘कैदी’ की तरह नहीं, बल्कि ‘संरक्षण’ में आए जीव की तरह प्रबंधित करना हो।

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पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 5 

2. मनमाने शुल्क निर्धारण पर रोक: डीएम द्वारा एकतरफा शुल्क (charges) तय करने की व्यवस्था ने गरीब पशुपालकों का शोषण किया है। इसे हटाकर एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था लानी चाहिए जो स्थानीय बाजार की दरों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखे। ऐसी व्यवस्था पंचायती राज से जुड़े कई कानूनों मे पहले से हैं पर यह प्रावधान उनके विपरीत हैं, इसीलिए इस कानून मे बदलाव करना आवश्यक हैं।

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Administrative Lex, Animal Juriprudence, Constitutional law, Criminal Lex

पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 4

4. नागरिक सुरक्षा और सेवा: इन केंद्रों का प्राथमिक उद्देश्य नागरिकों को आवारा जानवरों से होने वाली असुविधा से बचाना और साथ ही उन बेजुबान जानवरों को एक सुरक्षित आश्रय प्रदान करना हो। यह सरकार के संवैधानिक उत्तरदायित्व (अनुच्छेद 48A और 51A(g)) का हिस्सा माना जाए।

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पशु अतिचार अधिनियम १८७१: धारा 2, धारा 3

2. पशु: इस परिभाषा को और अधिक व्यापक और सरल बनाया जाना चाहिए। पशु से अभिप्राय उन सभी पालतू (domestic) और आवारा (stray) रीढ़धारी प्राणियों से है जो मानवीय देखरेख में हैं या सार्वजनिक स्थानों पर स्वतंत्र रूप से घूम रहे हैं। इसमें गाय, भैंस, घोड़ा, गधा, खच्चर, सुअर, भेड़, बकरी, ऊंट और हाथी के साथ-साथ अब कुत्ते, बिल्ली और अन्य सभी पालतू पक्षी या जानवर भी शामिल होंगे जो किसी की संपत्ति या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

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पशु अतिचार अधिनियम, 1871: विश्लेषणात्मक आलोचना

पशु अतिचार अधिनियम, 1871, स्पष्ट रूप से ब्रिटिश औपनिवेशिक प्रशासन की नीतियों और प्राथमिकताओं का परिणाम था, जिसका प्रभाव इस कानून के निर्माण और विस्तार दोनों पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यह अधिनियम सीधे तौर पर ब्रिटिश शासन की भूमि राजस्व संग्रह और नकद फसलों को बढ़ावा देने की नीति से जुड़ा हुआ था। ब्रिटिश सरकार के लिए कृषि भूमि की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण थी क्योंकि इससे उनका राजस्व आता था।

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Administrative Lex, Procedural Lex, Temple Lex

Boundaries of Public Welfare versus Heritage Preservation in India: Pataleshwar Caves Pune Case Part 2

The most critical point was the interpretation of Section 2(dc) of the Act. The court reasoned that the grade separator, which is an underpass set up to obviate traffic congestion and air pollution, constitutes a “facility for the public or a convenience for the public at large.” Since the statutory definition of “construction” in Section 2(dc) specifically excludes the provision of facilities of this nature for the public, the PMC’s work could not be regarded as prohibited construction under the Act.

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