हम एक ऐसे भविष्य की दहलीज पर खड़े हैं जहाँ मानवीय नैतिकता और तकनीक के बीच का संघर्ष चरम पर पहुँच गया है। इंटरनेट पर अनुचित सामग्री ने अब तक केवल हमारे पर्दों पर कब्जा किया था, लेकिन अब वह हमारे मस्तिष्क और अस्तित्व पर कब्जा करने के लिए तैयार है। यह संकट केवल व्यक्तिगत नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संपूर्ण संस्कृति का विनाश करने वाला डिजिटल तूफान साबित हो रहा है। यदि हमने आज इसे नहीं रोका, तो आने वाली पीढ़ियों के पास न तो अपना चरित्र होगा और न ही रिश्तों के प्रति लगाव। यह भयावह वास्तविकता हमारे दरवाजे पर आ खड़ी हुई है और इसकी अनदेखी करना अपने हाथों से अपना विनाश बुलाने जैसा है।
२१.१ भविष्य के लिए भविष्यवाणियां और तत्काल परिवर्तन के लिए अंतिम अनुरोध
आने वाला भविष्य केवल सूचनाओं का नहीं होगा, बल्कि वह अत्यधिक उत्तेजना का होगा। अनुचित सामग्री का प्रसार जिस गति से हो रहा है, उसे देखते हुए भविष्य में मानवीय भावनाओं के पूरी तरह समाप्त होने का डर है। हम एक ऐसी पीढ़ी को जन्म दे रहे हैं जिसके लिए शरीर केवल एक उपभोग की वस्तु होगी। यदि हमने तत्काल तकनीकी और कानूनी बदलाव नहीं किए, तो कल का समाज केवल वासना से प्रेरित होगा। ये बदलाव करने के लिए हमारे पास अब बहुत कम समय बचा है। यह अंतिम अनुरोध है कि आप अपने बच्चों को केवल तकनीक न सिखाएं, बल्कि उन्हें उसके इस विकराल खतरों से बचाने के लिए ढाल बनें। अन्यथा, इतिहास में हमारी पहचान एक ऐसी पीढ़ी के रूप में होगी जिसने अपनी आँखों के सामने अपनी संस्कृति की बलि दे दी।[1]
२१.२ मेटावर्स का खतरा: वर्चुअल रियलिटी में अश्लीलता
मेटावर्स और वर्चुअल रियलिटी (VR) जैसी तकनीकें अनुचितता को एक ऐसे स्तर पर ले जाने वाली हैं जहाँ आभास और वास्तविकता के बीच का अंतर समाप्त हो जाएगा। यह केवल देखने की सामग्री नहीं रह जाएगी, बल्कि यह ‘अनुभव करने’ का माध्यम बन जाएगी। मेटावर्स में व्यक्ति को अनुचित कृत्यों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का आभास होगा, जिससे मस्तिष्क की प्राकृतिक बनावट पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। वहाँ किए जाने वाले कृत्यों की कोई भौगोलिक सीमा या कानूनी बंधन नहीं होगा। यह तकनीक मानवीय मन को एक ऐसी अंधेरी गुफा में ले जाकर छोड़ देगी जहाँ से लौटने का कोई रास्ता नहीं होगा। यह डिजिटल दुनिया इंसान को सच्चे रिश्तों से तोड़कर एक कृत्रिम, हिंसक और विकृत दुनिया में हमेशा के लिए कैद कर देगी। यह खतरा हमारी कल्पना से कहीं ज्यादा बड़ा और नजदीक है।[2]
२१.३ एआई-निर्मित भ्रम: डीपफेक्स और सिंथेटिक मीडिया का भविष्य
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब अश्लीलता का सबसे घातक हथियार बन गई है। ‘डीपफेक्स’ के माध्यम से किसी भी सामान्य व्यक्ति का चेहरा अनुचित वीडियो में जोड़ना अब सेकंडों का काम हो गया है।[3] कल आपके परिवार के किसी भी व्यक्ति को बदनाम करने के लिए किसी कैमरे की जरूरत नहीं पड़ेगी; केवल एक फोटो से एआई उनका अश्लील जीवन तैयार कर देगा। सिंथेटिक मीडिया के कारण किसी की भी प्रतिष्ठा सुरक्षित नहीं रहेगी। यह भविष्य इतना अस्थिर होगा कि हम किसी पर भी विश्वास नहीं कर पाएंगे। सत्य की पूरी तरह मृत्यु हो जाएगी और केवल झूठ का साम्राज्य होगा। यह संकट हमारी व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सम्मान का गला घोंटने वाला है। यदि एआई पर अब नियंत्रण नहीं पाया गया, तो कल की दुनिया ‘ब्लैकमेल’ और ‘डिजिटल आतंक’ का केंद्र बन जाएगी।
२१.४ २०३५ की तस्वीर: असंवेदनशील समाज या सुधरा हुआ समाज?
वर्ष २०३५ तक हमारा समाज किस दिशा में होगा, यह आज के हमारे कार्यों पर निर्भर करता है। यदि हम ऐसे ही निष्क्रिय रहे, तो २०३५ का समाज पूरी तरह असंवेदनशील होगा। जहाँ बलात्कार, हिंसा और विकृति केवल खबरें नहीं बल्कि मनोरंजन का हिस्सा बन चुकी होंगी। इंसानों के भीतर की सहानुभूति समाप्त हो चुकी होगी और प्रत्येक व्यक्ति की आँखों में केवल अश्लीलता से भरी आभासी दुनिया होगी। यह समाज मानसिक बीमारियों से ग्रस्त होगा, जहाँ आत्महत्या की दर बहुत बढ़ी हुई होगी। परिवार व्यवस्था केवल कागजों पर रह जाएगी। इसके विपरीत, यदि हम आज संघर्ष करेंगे, तभी हम एक सुधरा हुआ और नैतिक समाज देख पाएंगे। हमारे द्वारा चुने गए रास्ते पर ही हमारे पोते-पोतियों का भविष्य निर्भर है। हम उन्हें एक डिजिटल कब्रिस्तान देंगे या एक सुरक्षित समाज, यह प्रश्न आज हमारे सामने खड़ा है।
२१.५ आर्थिक लागत: सामाजिक पतन का भारत के विकास पर प्रभाव
अनुचित सामग्री का प्रसार केवल एक सामाजिक समस्या नहीं है, बल्कि यह भारत के आर्थिक विकास को लगी एक दीमक है। जिस देश की युवा पीढ़ी दिन के पाँच से छह घंटे अश्लील सामग्री में बिताती है, उस देश की उत्पादकता शून्य हो जाती है।[4] मानसिक स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ने और अपराध में वृद्धि होने के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा दबाव आएगा। युवा पीढ़ी के रचनात्मक विचार समाप्त होने के कारण नए आविष्कार और विकास रुक जाएंगे। सामाजिक अस्थिरता के कारण विदेशी निवेशक अपना मुँह मोड़ लेंगे। भारत की सबसे बड़ी ताकत ‘युवा शक्ति’ यदि अश्लीलता के व्यसन में फंस गई, तो हम विश्वगुरु बनने का सपना कभी पूरा नहीं कर पाएंगे। यह आर्थिक पतन हमें कई दशक पीछे ले जाएगा, जिसकी कीमत हमारे पूरे देश को चुकानी पड़ेगी।
२१.६ अंतिम रुख: अभी कार्रवाई करना क्यों आवश्यक है
समय किसी के लिए नहीं रुकता और तकनीक का भस्मासुर अब हमारे नियंत्रण से बाहर जाने की स्थिति में है। आज हमारे पास अवसर है कि हम एक साथ आकर इस डिजिटल विकृति का प्रतिकार कर सकते हैं। यदि हम आज चुप रहे, तो कल चिल्लाने की शक्ति भी हमारे भीतर नहीं बचेगी। अश्लीलता ने हमारे घर की दीवारों को लाँघकर हमारे बच्चों के मन में प्रवेश कर लिया है। अब विचार करने का समय निकल गया है, अब केवल प्रहार का समय है। प्रत्येक अभिभावक, प्रत्येक शिक्षक और प्रत्येक नागरिक को इसके विरुद्ध युद्ध छेड़ना आवश्यक है।
[1] Sadhna Singh, “Online Safety For Children: Protecting The Next Generation From Harm”, NITI Ayog
[2] Borivoje Baltezarević, “Metaphysics Of The Virtual: From Plato’s Cave To Modern VR—Questioning Reality’s Essence”, Politika I Bezbednost, Vol. 20, № 3, 2023: 165–172.
[3] Advocate (Dr.) Abhishek Gandhi, “Deepfakes and the Law: The Emerging Threat of Digital Deception”, Abhishek Gandhi, Dt. 28.7.2025, available at: https://advocategandhi.com/deepfakes-and-the-law-the-emerging-threat-of-digital-deception/, last visited on 21.12.2025
[4] Divya Bhati “More than half of Indian youth aged 9-17 spend over 3 hours daily on social media, gaming: Study”, India Today, available at: https://www.indiatoday.in/technology/news/story/more-than-half-of-indian-youth-aged-9-17-spend-over-3-hours-daily-on-social-media-gaming-study-2449702-2023-10-16, last visited on 21.12.2025

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