अभद्र और अनुचित सामग्री का प्रसार करने के लिए तकनीक का उपयोग किसी शस्त्रागार की तरह किया जा रहा है। इसमें न केवल दृश्य चित्र, बल्कि शब्द, आवाज और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर हमला किया जाता है। ऐसे कई उदाहरण हैं जिनमें प्रतिष्ठित व्यक्तियों के ऐसे वीडियो बनाकर साझा किए गए हैं। देश के प्रधानमंत्री को भी ऐसी विक्षिप्त मानसिकता वाले क्रिएटर्स ने नहीं छोड़ा। इन विभिन्न प्रकार के डिजिटल शस्त्रों का विस्तृत विश्लेषण नीचे दिया गया है।
५.१ दृश्य हमला: स्पष्ट चित्र और नग्नता का प्रसार
डिजिटल युग में अनुचितता का सबसे बड़ा और प्रभावी प्रकार दृश्य सामग्री है। हाई-डेफिनिशन कैमरों और तेज इंटरनेट के कारण नग्नता और स्पष्ट यौन छवियों का प्रसार करना अत्यंत सरल हो गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अक्सर ऐसी छवियों को कला या फैशन के नाम पर प्रचारित किया जाता है, जिससे दर्शकों की मानसिकता पर सीधा प्रभाव पड़ता है। ये दृश्य हमले केवल वयस्क वेबसाइटों तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि ये व्हाट्सएप ग्रुप्स और टेलीग्राम चैनल के माध्यम से व्यक्तिगत संदेशों तक पहुंच गए हैं। ऐसी छवियों की निरंतर बौछार मानव मस्तिष्क को उत्तेजित करती है और वास्तविक रिश्तों के प्रति धारणाओं को बदल देती है। महिलाओं के शरीर के वस्तुकरण में इस दृश्य सामग्री का बड़ा हाथ है। इस प्रकार की सामग्री के कारण समाज में यौन अपराधों में वृद्धि होती देखी जा रही है, क्योंकि ऐसी छवियों से यौन इच्छाओं का विकृतीकरण होता है और नैतिक सीमाएं शिथिल हो जाती हैं।[1]
५.२ लिखित शब्द: अनुचित साहित्य और अपशब्द वाली टिप्पणियां
केवल चित्र ही नहीं, बल्कि लिखित शब्द भी अनुचितता का प्रसार करने के लिए प्रभावी शस्त्र साबित हो रहे हैं। इंटरनेट पर उपलब्ध अनुचित कथाओं का साहित्य पाठकों की कल्पना शक्ति का दुरुपयोग करता है। इसके अतिरिक्त, सोशल मीडिया के कमेंट सेक्शन में उपयोग किए जाने वाले अपशब्द और अभद्र शब्द एक गंभीर समस्या बन गए हैं। किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति या सामान्य महिला की पोस्ट पर की जाने वाली गंदी टिप्पणियां भाषाई शोषण का उदाहरण हैं। ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म पर चलने वाले अभद्र थ्रेड्स का उपयोग विशिष्ट व्यक्ति की बदनामी के लिए किया जाता है। लिखित स्वरूप की यह अभद्रता पढ़ने वाले के मन पर गहरा प्रभाव डालती है और समाज में भाषा के स्तर को गिराने का कारण बनती है।[2] इस प्रकार की लिखित सामग्री से साइबर बुलिंग की घटनाएं बढ़ती हैं, जिससे पीड़ित व्यक्ति को मानसिक कष्ट सहना पड़ता है। शब्दों के माध्यम से फैलाई जाने वाली यह विषैली संस्कृति डिजिटल दुनिया को असुरक्षित बना रही है।
एक वर्ष पहले यूट्यूब के एक वायरल शो में बोले गए अभद्र संवादों के कारण देशभर में आक्रोश पैदा हुआ था। एक समय ऐसा था जब बहुत से अपशब्दों का अर्थ भी लोगों को पता नहीं था, क्योंकि लोग एकांत में ही निजी क्रियाएं करते थे। आज के डिजिटल युग में ऐसे संबंधों को रिकॉर्ड करके डिजिटल सार्वजनिक माध्यमों से प्रसारित किया जा रहा है। यदि बार-बार ऐसी सामग्री देखी जा रही है, जिसमें प्रेम नहीं बल्कि केवल भोग-विलास है, तो लोगों की बोलचाल में उस क्रिया से जुड़े कमर के नीचे के अपशब्द क्यों नहीं आएंगे?
५.३ विषैला ऑडियो: अपशब्दों वाले वॉयस नोट्स और अनुचित गाने
आधुनिक तकनीक के कारण अब अनुचितता केवल आंखों तक सीमित न रहकर कानों तक भी पहुंच गई है। व्हाट्सएप और मैसेंजर पर भेजे जाने वाले अनुचित वॉयस नोट्स इसका मुख्य उदाहरण हैं। अक्सर महिलाओं को धमकाने या उनका शोषण करने के लिए ऐसे अनुचित संवादों का उपयोग किया जाता है। साथ ही, हाल के दिनों में ऐसे गानों का उदय हुआ है जिनके शब्द अत्यंत घृणित और स्त्रियों का अपमान करने वाले होते हैं। ये गाने सोशल मीडिया रील्स के माध्यम से वायरल होते हैं और बच्चों से लेकर वृद्धों तक सभी के कानों में पड़ते हैं। संगीत का उपयोग करके अनुचितता को मनोरंजन का रूप दिया जा रहा है, जो अधिक खतरनाक है।[3] ऐसे विषैले ऑडियो के कारण सार्वजनिक स्थानों पर या पारिवारिक वातावरण में संकोच पैदा होता है। आवाज का यह दुरुपयोग लोगों की व्यक्तिगत गोपनीयता पर हमला करने और उन्हें मानसिक रूप से कमजोर करने के लिए किया जाता है।
५.४ डीपफेक्स और मॉर्फिंग: बिना सहमति वाली छवियों की नई सीमा
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का सबसे भयानक दुरुपयोग डीपफेक्स और मॉर्फिंग है। इस तकनीक के कारण किसी सामान्य व्यक्ति या प्रसिद्ध व्यक्ति का चेहरा किसी अन्य अनुचित वीडियो या फोटो पर हूबहू लगा दिया जाता है। यह इतना यथार्थवादी होता है कि असली और नकली के बीच अंतर करना कठिन हो जाता है। इसमें संबंधित व्यक्ति की कोई सहमति नहीं होती, फिर भी उनकी छवियों का उपयोग करके उनका यौन शोषण किया जाता है। विशेष रूप से महिलाओं को निशाना बनाने के लिए इस तकनीक का उपयोग बढ़ा है, जिसे ‘नॉन-कन्सेंशुअल इंटिमेट इमेजरी’ कहा जाता है। मॉर्फिंग के माध्यम से किसी की साधारण तस्वीरों को अभद्र चित्रों में बदलकर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता है। यह तकनीक डिजिटल अपराध की एक नई और अत्यंत खतरनाक सीमा है।[4] इससे न केवल व्यक्ति की छवि धूमिल होती है, बल्कि उसका संपूर्ण सामाजिक और मानसिक जीवन नष्ट हो सकता है। इस नए प्रकार के अपराध को अभी तक उचित कानूनी परिभाषा नहीं दी गई है और इसमें जितनी देरी होगी, उतना ही कष्ट समाज के सामान्य व्यक्तियों को भोगना पड़ेगा। केवल सड़कें और पुल बनाकर विश्वगुरु नहीं बना जा सकता, इस भयानक प्रवृत्ति को रोकने के उपाय करने पर ही यह संभव होगा। भारत में एक समय पर पराई स्त्री को माता, बहन या कन्या माना जाता था और पराए पुरुष को पिता, भाई या पुत्र माना जाता था, लेकिन इस डिजिटल गंदगी ने सभी मान्यताओं को मिट्टी में मिला दिया है।
५.५ सांस्कृतिक दुरुपयोग: अनुष्ठानों और पहनावे का यौनकरण
अनुचितता के शस्त्रागार में एक सूक्ष्म लेकिन घातक प्रकार सांस्कृतिक प्रतीकों का दुरुपयोग है। पारंपरिक अनुष्ठानों, त्योहारों और पहनावे को जानबूझकर यौन स्वरूप दिया जा रहा है। उदाहरण के लिए, साड़ी या अन्य पारंपरिक पहनावे को इस तरह से पहनना या उसका प्रस्तुतीकरण करना जिससे केवल अभद्रता झलके। कई रील्स और वीडियो में धार्मिक गानों पर या सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अनुचित हाव-भाव किए जाते हैं। इससे उस संस्कृति की पवित्रता नष्ट होती है और नई पीढ़ी तक संस्कृति का गलत अर्थ पहुंचता है। जब सांस्कृतिक विरासत को अश्लीलता की नजर से देखा जाता है, तब समाज की नैतिक नींव कमजोर हो जाती है।[5] इस प्रकार के यौनकरण से मनोरंजन नहीं हो रहा, बल्कि यह संस्कृति की विडंबना बन रही है। यह कार्य जानबूझकर विभिन्न समुदायों की भावनाओं को आहत करने या केवल व्यूज पाने के लिए किया जाता है, जो सामाजिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। बॉलीवुड ने होली का विकृतीकरण किया ही है और अब सोशल मीडिया पूरी संस्कृति का विकृतीकरण कर रहा है।[6]
[1] Tanya Sara George, “Modern Platforms, Outdated Laws”, P39A Criminal Law Blog, available at: https://p39ablog.com/2025/01/modern-platforms-outdated-laws/, last visited on 5.12.2025
[2] Isabel Cachola, Eric Holgate, Daniel Preot¸iuc-Pietro, Junyi Jessy Li, “Expressively vulgar: The socio-dynamics of vulgarity and its effects on sentiment analysis in social media”, Proceedings of the 27th International Conference on Computational Linguistics, pages 2927–2938 Santa Fe, New Mexico, USA, August 20-26, 2018.
[3] “Obscene Entertainment and Its Effect on Indian Society”, Talkitout, available at: https://www.talkitout.in/post/obscene-entertainment-and-its-effect-on-indian-society, last visited on 5.12.2025
[4] “Morphing Menace: What Every Policeman Must Know to Combat Online Image Abuse”, Cyber Hygiene, available at: https://cyberhygiene.community/blogdetails/what-every-policeman-must-know-to-combat-online-image-abuse, last visited on 5.12.2025
[5] Pooja Tripathi, “Obscenity in Content and Indian Philosophical Views”, Philosophical multiverse, Dt. 21.2.2025, https://thephilosophicalmultiverse.com/obscenity-in-content/, last visited on 5.12.2025
[6] Rinku Tai, “होली का विकृत स्वरूप: होली गीतों पर एक चिंतन”, unpublished, available at: https://aratt.ai/@rinkutai222361/392,

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Interesting topic. I wonder what types of inappropriate materials are commonly overlooked in these discussions.