४. निर्माता – प्रेरणा और मनोविज्ञान

अनुचित सामग्री के निर्माण के पीछे केवल तकनीक नहीं, बल्कि मानवीय मानसिकता और आर्थिक गणित का एक जटिल जाल है। आज के डिजिटल युग में सामग्री निर्माता (कंटेंट क्रिएटर) बनना आसान हो गया है, फिर भी अनुचितता के क्षेत्र में उतरने के पीछे मानसिक खिंचाव और आर्थिक लाभ की बड़ी भूमिका होती है। इस प्रक्रिया में नैतिकता से अधिक प्रसिद्धि और मुनाफे को महत्व दिया जाता दिख रहा है। निर्माताओं की प्रेरणा और उसके पीछे के मनोविज्ञान का विस्तृत विश्लेषण किए बिना इसके कारणों को समझना संभव नहीं है।

४.१ निर्माता का मनोविज्ञान: प्रदर्शन से मान्यता

अनुचित या अभद्र सामग्री तैयार करने वाले निर्माताओं की मानसिकता में सामाजिक मान्यता (वैलिडेशन) की तीव्र भूख होती है। डिजिटल दुनिया में लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज को सफलता का पैमाना माना जाता है। जब कोई व्यक्ति अपने शरीर या निजी क्षणों का प्रदर्शन करता है, तो उसे मिलने वाली तत्काल प्रसिद्धि एक प्रकार का क्षणिक मानसिक संतोष पैदा करती है। कई लोगों के लिए यह केवल ध्यान आकर्षित करने का साधन होता है। समाज में सामान्य रूप से जो चीजें वर्जित मानी जाती हैं, उन्हें खुलेआम प्रस्तुत करने से मिलने वाली सनसनीखेज प्रसिद्धि निर्माता को शक्ति का एक झूठा आभास कराती है। इस मानसिकता के कारण व्यक्ति धीरे-धीरे अधिक भड़काऊ सामग्री बनाने का आदी हो जाता है, जहाँ नैतिकता का स्थान केवल दर्शकों की प्रतिक्रिया ले लेती है।[1]

४.२ क्रिएटर इकोनॉमी: जब अभद्रता करियर बनती है

वर्तमान समय में अनुचित सामग्री का निर्माण एक संगठित डिजिटल व्यवसाय बन गया है। कई प्लेटफॉर्म निर्माताओं को उनकी सामग्री के बदले सीधे पैसे दिलाते हैं। जब अभद्रता को आर्थिक मूल्य प्राप्त होता है, तब कई युवक-युवतियां इसे एक आसान और फायदेमंद करियर के रूप में देखने लगते हैं। पारंपरिक नौकरियों की तुलना में कम मेहनत और कम समय में अधिक पैसा कमाने की चाह निर्माताओं को इस व्यवसाय में टिकाए रखती है। एक बार जब इससे आय शुरू हो जाती है, तो नैतिक मूल्य गौण हो जाते हैं। ‘सब्सक्रिप्शन मॉडल’ के कारण निर्माताओं पर निरंतर नई और अधिक स्पष्ट सामग्री देने का दबाव रहता है। इस प्रकार, क्रिएटर इकोनॉमी ने अनुचितता को एक व्यावसायिक उद्योग का स्वरूप दे दिया है, जहाँ मानवीय प्रतिष्ठा से अधिक लाभ के बारे में सोचा जाता है।[2]

४.३ ट्रेंड्स की नकल करने की प्रवृत्ति

सोशल मीडिया के एल्गोरिदम अक्सर ऐसी सामग्री को बढ़ावा देते हैं जो विवादास्पद या उत्तेजक होती है। नए निर्माता जब देखते हैं कि उनके साथी या प्रसिद्ध इन्फ्लुएंसर्स कामुक शैली का उपयोग करके तेजी से प्रसिद्ध हो रहे हैं, तो वे भी उसी मार्ग का अनुसरण करने लगते हैं। इसे ही ‘पीयर प्रेशर’ या साथियों का दबाव कहा जाता है। ट्रेंड में बने रहने की होड़ में कई युवक-युवतियां जाने-अनजाने अनुचितता की सीमा रेखा पर स्थित सामग्री तैयार करने लगते हैं। शुरुआत में यह केवल एक मजेदार नकल होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर आपत्तिजनक सामग्री में बदल जाती है। अपनी अलग पहचान बनाने के बजाय, सफल निर्माताओं की अनुचित शैली की नकल करना प्रसिद्धि का शॉर्टकट माना जा रहा है।[3]

४.४ निर्माता के रूप में महिलाएं: विकल्प और लाभ का जाल

अनुचित सामग्री की दुनिया में महिला निर्माताओं की भूमिका अत्यंत जटिल है। कुछ महिलाएं इसे अपनी इच्छा और आर्थिक स्वतंत्रता के साधन के रूप में देखती हैं, जिसे अक्सर ‘एंपावरमेंट’ (सशक्तीकरण) का मुखौटा पहनाया जाता है। हालांकि, इस चुनाव के पीछे अक्सर आर्थिक तंगी और गलत व्यक्ति की जबरदस्ती छिपी होती है। एक बार इस क्षेत्र में कदम रखने के बाद इससे बाहर निकलना कठिन होता है, क्योंकि इंटरनेट पर एक बार अपलोड की गई सामग्री स्थायी रूप से रह जाती है। लाभ के इस जाल में महिलाओं का शरीर केवल एक उत्पाद बन जाता है। इसमें स्वेच्छा और शोषण के बीच की रेखा अत्यंत धुंधली होती है। अक्सर एजेंटों या बिचौलियों द्वारा होने वाली धोखाधड़ी और साइबर ब्लैकमेलिंग के कारण महिलाओं को इस दलदल में मजबूरीवश रहना पड़ता है।

किशोरावस्था में कई लड़कियां गलत लड़के के प्यार में पड़ जाती हैं और वे भी इस दलदल में फंसती चली जाती हैं। चौदह-पंद्रह साल की उम्र ऐसी ही होती है, शरीर में होने वाले बदलाव विपरीत लिंग के व्यक्ति के प्रति आकर्षण पैदा करते हैं। इस बदलाव के दौरान यदि अपनी मानसिक स्थिति को सही रखकर पढ़ाई में मन नहीं लगाया गया, तो यह आकर्षण गलत व्यक्ति तक जाने और उस व्यक्ति के अनुसार व्यवहार करने का कारण बनता है। फिर जाने-अनजाने वह मासूम लड़की वह कर बैठती है जो उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक हो जाता है। और जिस लड़के या पुरुष के साथ उसने यह किया होता है, वह अक्सर इस पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लेता है। इसके बाद वह लड़की ब्लैकमेलिंग की शिकार होती है और दलदल में फंसती जाती है। इतने दिनों तक यह केवल लड़कियों के साथ होता था, लेकिन अब इंटरनेट पर मौजूद अति विचित्र अनुचित सामग्री के कारण लड़के भी इसके शिकार होने लगे हैं।

४.५ नाबालिगों का शोषण: कंटेंट निर्माण का खतरा

अनुचित सामग्री के उद्योग में नाबालिग लड़कियों और लड़कों का शामिल होना सबसे चिंताजनक बात है। सोशल मीडिया के ग्लैमर और पैसों के लालच में आकर कुछ बच्चे कंटेंट निर्माण की ओर मुड़ जाते हैं, तो कुछ पहले बताए अनुसार ब्लैकमेलिंग के कारण इस दलदल में गिर जाते हैं। कभी-कभी माता-पिता ही प्रसिद्धि के लिए अपने बच्चों को ऐसी सामग्री बनाने के लिए प्रेरित करते हैं, जो बच्चों की उम्र के अनुकूल नहीं होती।[4] इंटरनेट पर मौजूद शिकारी (प्रेडेटर्स) ऐसे बच्चों की तलाश करके उन्हें अश्लील कृत्यों में खींचते हैं। बच्चे अक्सर परिणामों का विचार किए बिना अपनी निजी जानकारी या फोटो साझा कर देते हैं, जिसका उपयोग बाद में उनके शोषण के लिए किया जाता है। डिजिटल साक्षरता का अभाव और माता-पिता की अनदेखी के कारण बच्चे इस जाल में फंस जाते हैं। यह शोषण उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर स्थायी निशान छोड़ने वाला साबित होता है।[5]


[1] Sunnyemmanueludeze, Chikezie Emmanueluzuegbunam, “Sensationalism in the media: the right to sell or the right to tell?”, Journal of Communication and Media Research Vol. 5 No. 1, April 2013

[2] FP News Desk, “Why is ‘creator economy’ called ‘orange economy’ and why India’s betting big on it”, Firstpost, Dt. 2.5.2025, available at: https://www.firstpost.com/india/why-is-creator-economy-called-orange-economy-and-why-indias-betting-big-on-it-13885000.html, last visited on 4.12.2025

[3] Tamara Cohen, “Teenagers exposed to ‘horrific’ content online – and this survey reveals the scale of the problem” Sky News, available at: https://news.sky.com/story/teenagers-exposed-to-horrific-content-online-and-this-survey-reveals-the-scale-of-the-problem-13331556, last visited on 4.12.2025

[4] Naomi Lashley, When Kids Are the Content, Who’s Profiting? NYU law, Dt. 18.2.2025, available at: https://jipel.law.nyu.edu/when-kids-are-the-content-whos-profiting/, last visited on 4.12.2025

[5] “What is sharenting? 7 questions about sharing your children’s information online”, Unicef, available at: https://www.unicef.org/lac/en/parenting-lac/security-protection/sharenting-questions-sharing-child-information, last visited on 4.12.2025

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