३. अनैतिकता का डिजिटल रूपांतरण

आज हम डिजिटल युग में हैं। प्रत्येक कार्य हम इंटरनेट के उपयोग से शीघ्रता से कर पा रहे हैं। इसी डिजिटल युग का एक समय ऐसा था जब एक बड़ा कंप्यूटर दुनिया से जुड़ता था और उसमें भी सामान्य लोग इंटरनेट कैफे जाकर इंटरनेट का उपयोग करते थे। लेकिन अब स्मार्टफोन घर-घर में है और यह समय की मांग भी है। कोरोना काल में स्मार्टफोन के कारण ही स्कूल, कॉलेज और पढ़ाई संभव हो पाई थी। लेकिन यह क्रांति हमारे लिए तभी उपयोगी है जब हम इसका सही उपयोग कर सकें। आज पढ़ाई के ऐप्स और साइट्स पर भी अंतरंगता का प्रदर्शन करने वाले विज्ञापन दिखाई देते हैं, जो पूरी तरह से गलत है।

३.१ स्मार्टफोन क्रांति: वयस्क साहित्य हर किसी की जेब में

स्मार्टफोन के आगमन ने सूचना प्रौद्योगिकी में क्रांति ला दी, लेकिन इस क्रांति का एक स्याह पहलू अनुचित सामग्री की सहज उपलब्धता है। पहले ऐसी सामग्री के लिए विशिष्ट दुकानों या छिप-छिपकर की जाने वाली मशक्कत अब पूरी तरह समाप्त हो गई है। हाई-स्पीड इंटरनेट और सस्ते स्मार्टफोन के कारण यह सामग्री अब हर किसी के व्यक्तिगत स्थान यानी जेब में पहुंच गई है। इससे न केवल वयस्क, बल्कि नाबालिग बच्चे भी बिना किसी बाधा के ऐसी सामग्री के संपर्क में आ रहे हैं। स्मार्टफोन के प्राइवेसी फीचर्स और पासवर्ड लॉक के कारण उपयोगकर्ता क्या देख रहा है, इसका पता लगाना कठिन हो गया है। इस सुलभता के कारण अनुचितता का सामान्यीकरण हो गया है, जिसका मानवीय व्यवहार और मानसिकता पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। डिजिटल स्क्रीन से मिलने वाला यह एकांत नैतिक मूल्यों के पतन का कारण बन रहा है।[1]

३.२ सोशल मीडिया का प्रवेश: नए वितरक

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की शुरुआत संचार के लिए की गई थी, लेकिन आज वे अनुचित सामग्री के प्रमुख वितरक बन गए हैं। ट्विटर (एक्स), टेलीग्राम और इंस्टाग्राम जैसे माध्यमों पर एल्गोरिदम का उपयोग करके ऐसी सामग्री का प्रचार किया जाता है। टेलीग्राम जैसे ऐप्स में चैनल और ग्रुप्स के माध्यम से बड़े पैमाने पर अश्लील वीडियो और फोटो पल भर में हजारों लोगों तक पहुंचा दिए जाते हैं। इन प्लेटफॉर्म्स पर उपयोगकर्ताओं का ध्यान खींचने के लिए अक्सर भड़काऊ और अश्लील थंबनेल का उपयोग किया जाता है। सोशल मीडिया पर यह वितरण इतना तीव्र है कि इस पर नियंत्रण पाना साइबर सुरक्षा प्रणालियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। फॉलोअर्स बढ़ाने और प्रसिद्धि पाने के लिए अक्सर इस मार्ग का सहारा लिया जाता है, जिससे सामाजिक नैतिकता की सीमाएं लांघी जा रही हैं।[2]

महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी सामग्री प्रसारित करके ये सार्वजनिक प्लेटफॉर्म भारी कमाई कर रहे हैं। सदस्यता, विज्ञापन, मोनेटाइजेशन आदि तरीकों से सोशल मीडिया ऐप्स और साइट्स कमाई करते हैं। आपको लगता होगा कि सोशल मीडिया मुफ्त है, लेकिन टेक दिग्गज आपको ऐसी वायरल अनुचित सामग्री दिखाकर भारी विज्ञापन राजस्व कमाते हैं। निर्माण करने वाला भी अपनी सामग्री को कमाई का साधन बनाता है और इसके लिए मोनेटाइजेशन किया जाता है, जिसका कुछ हिस्सा प्लेटफॉर्म के रूप में ये कंपनियां कमाती हैं।[3] इसलिए इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका प्लेटफॉर्म की है। जब तक प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह गंदगी समाज को दूषित और बीमार करती रहेगी।

३.३ उपयोगकर्ता द्वारा निर्मित सामग्री का उदय (यूजीसी)

डिजिटल युग में केवल व्यावसायिक कंपनियां ही नहीं, बल्कि सामान्य उपयोगकर्ता भी सामग्री निर्माता बन गए हैं। इससे निर्माण की सीमाएं पूरी तरह से धुंधली हो गई हैं। ‘ओनलीफैन्स’ जैसे प्लेटफॉर्म्स के कारण सामान्य व्यक्ति अपनी अनुचित सामग्री बनाकर बेचने लगे हैं। उपयोगकर्ता द्वारा निर्मित सामग्री (यूजर जनरेटेड कंटेंट) के कारण व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन के बीच का अंतर कम हो गया है। स्मार्ट उपकरणों की मदद से कोई भी अपना फिल्मांकन करके उसे वैश्विक स्तर पर प्रसारित कर सकता है। इस प्रवृत्ति के कारण अनुचितता केवल एक उद्योग न रहकर, अब एक घरेलू काम बन गई है। इसमें सहमति, गोपनीयता और शोषण जैसे गंभीर प्रश्न उत्पन्न हो रहे हैं। निर्माण की इस सुलभता के कारण अनुचित सामग्री की बाढ़ आ गई है, जिस पर निगरानी रखना असंभव सा हो गया है।[4] इस बाढ़ में सभी के बह जाने से पहले इस पर कठोर उपाय करना आवश्यक है।

३.४ गुमनामी की ढाल और अनुचित सामग्री

डिजिटल जगत की गुमनामी आपत्तिजनक अनुचित सामग्री फैलाने के लिए एक मजबूत ढाल साबित हो रही है। फर्जी प्रोफाइल और उपनामों का उपयोग करके लोग बिना किसी डर के अनुचित सामग्री साझा करते हैं। बिना चेहरे वाली इन प्रोफाइल से आपराधिक प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिलता है। शाब्दिक अश्लीलता, मॉर्फ किए गए फोटो और आपत्तिजनक वीडियो बिना किसी सामाजिक जिम्मेदारी के प्रसारित किए जाते हैं। गुमनामी के कारण उपयोगकर्ता को लगता है कि उसे कोई पकड़ नहीं पाएगा, जिससे वह अधिक हिंसक या विकृत सामग्री की ओर बढ़ता है। यह ढाल उपयोगकर्ता को साइबर बुलिंग और यौन शोषण जैसे कार्यों के लिए प्रेरित करती है। गुमनामी के कारण नैतिक बंधन ढीले हो जाते हैं और इंटरनेट का उपयोग केवल स्वच्छंद व्यवहार के लिए किया जाने लगता है, जिससे डिजिटल पर्यावरण का स्वास्थ्य बिगड़ता है।[5]

इसी गुमनामी का उपयोग करके हनी ट्रैप जैसी घटनाएं वयस्कों के साथ होती हैं, जबकि गलती से अनुचित सामग्री देख लेने के कारण लड़के-लड़कियां विचलित हो जाते हैं। घर के प्रत्येक सदस्य को बचाने और सामाजिक स्वास्थ्य को उत्तम बनाए रखने के लिए घर-घर में इस विषय पर जागरूकता आवश्यक है। इसीलिए यह पुस्तक पहले मराठी में लिखी गई है और फिर हिन्दी और अंग्रेजी मे अनुवादित की गई हैं, ताकि सामान्य लोग भी इसे पढ़ सकें। यदि आप हिन्दी के साथ अन्य भाषाओं में भी कुशल हैं, तो आप इस पुस्तक का अनुवाद करके इस मुहिम में सहभागी हो सकते हैं।

३.५ २४/७ चक्र: निरंतर पहुंच

डिजिटल युग से पहले अनुचित सामग्री का उपयोग सीमित और कभी-कभार होता था, लेकिन अब यह २४/७ उपलब्ध रहने वाला एक अखंड चक्र बन गया है। इंटरनेट कभी बंद नहीं होता, इसलिए दिन के किसी भी समय और किसी भी स्थान पर यह सामग्री उपलब्ध होती है। इस निरंतर उपलब्धता के कारण लोगों में व्यसन बढ़ रहा है। निरंतर पहुंच के कारण मस्तिष्क में डोपामाइन का स्तर बाधित होता है, जिसका परिणाम व्यक्ति के वास्तविक जीवन के रिश्तों पर पड़ता है। यह चक्र इतना तेज है कि उपयोगकर्ता एक वीडियो से दूसरे वीडियो की ओर लगातार खिंचा चला जाता है। मोबाइल नोटिफिकेशन के कारण अनुचितता का यह प्रभाव उपयोगकर्ता को निरंतर घेरे रहता है। इससे बाहर निकलना कठिन होता जा रहा है और यह निरंतर चक्र मानवीय संवेदनशीलता को कम कर रहा है तथा अनुचितता को जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बना रहा है।[6]


[1] Jeffrey A. Hall and Andy J. Merolla, “Loneliness and Screens: Causes and Consequences” Yale University Press, Dt. 7.6.2024 available at: https://yalebooks.yale.edu/2024/06/07/loneliness-and-screens-causes-and-consequences/, Last visited on 3.12.2025

[2] Gagandeep Kaur, Utkarsha Bonde, Kunjal Lalit Pise, Shruti Yewale, Poorva Agrawal, Purushottam Shobhane, Shruti Maheshwari , Latika Pinjarkar and RupaliGangarde, “Social Media in the Digital Age: A Comprehensive Review of Impacts, Challenges and Cybercrime”, Eng. Proc. 2024, 62, 6. Available at: https://doi.org/10.3390/engproc2024062006, Last visited on 3.12.2025

[3] Daniel Pereira, “7 Examples of How Content Creators Make Money”, Dt. 9.5.2025, Available at: https://businessmodelanalyst.com/how-do-content-creators-make-money/, Last visited on 3.12.2025

[4] Madhav Singh Bisht and Dewansh Bharadwaj, “Art, Expression and Law: When Does Creativity Cross the Line into Obscenity” LegalBites, Dt. 24.3.2025, available at: https://www.legalbites.in/topics/articles/art-expression-and-law-when-does-creativity-cross-the-line-into-obscenity-1124619

[5] “Cybercrime and the Anonymity Effect: A Deep Dive into Online Disinhibition”, Psychologs Magazine News, Dt. 19.4.2025, available at: https://www.psychologs.com/cybercrime-online-disinhibition-and-anonymity/, last visited on 3.12.2025

[6] “Porn and Dopamine: The Neurochemical Impact of Excessive Viewing”, NeuroLaunch Dt. 22.8.2024, available at: https://neurolaunch.com/porn-dopamine/, last visited on 3.12.2025

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