पुस्तक की प्रस्तावना
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023: धारा 1
2.1 परिभाषाओं का महत्व
BNSS की धारा 2 में दी गई परिभाषाएं कानूनी प्रक्रिया की आधारशिला हैं। ये परिभाषाएं न्यायालय की कार्यवाही में शामिल प्रत्येक शब्द और अवधारणा के लिए एक स्पष्ट और सर्वमान्य अर्थ स्थापित करती हैं। यह स्पष्टता अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुनिश्चित करती है कि अभियोजन, बचाव पक्ष, और न्यायाधीश एक ही कानूनी भाषा का उपयोग कर रहे हैं। इन परिभाषाओं के अभाव में, कानूनी शब्दों की व्याख्या में विसंगतियां आ सकती हैं, जिससे न्याय प्रशासन में भ्रम, देरी, और अन्याय उत्पन्न हो सकता है। संक्षेप में, धारा 2 की परिभाषाएं न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष, सुसंगत और कुशल बनाने के लिए एक आवश्यक ढांचा प्रदान करती हैं, जिससे अंततः सही न्याय सुनिश्चित होता है।
2.2 श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन
2.2.1 मूल प्रावधान
2. परिभाषाएँ. (1) इस संहिता में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,-
(क) “श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन” के अंतर्गत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के प्रयोजनों के लिए पहचान, तलाशी और अभिग्रहण या साक्ष्य की प्रक्रियाओं को अभिलिखित करना, इलेक्ट्रॉनिक संसूचना का पारेषण और अन्य प्रयोजनों के लिए किसी संसूचना उपकरण का उपयोग और ऐसे अन्य साधन भी हैं, जिसे राज्य सरकार नियमों द्वारा उपबंधित करे;
2.2.2 विश्लेषण
CrPC के 2009 के संशोधन के बाद “श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन” इन शब्दों को इस अधिनियम मे विविध प्रावधानों मे स्थान दिया गया था। आइए इन शब्दों का अर्थ सरल भाषा मे समझते हैं। यह परिभाषा मूलतः यह बताती है कि “श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन” (Audio-Video Electronic Means) की परिभाषा मे कौन से साधन शामिल हैं और अगर कोई नए तरह के साधन जिससे आवाज एवं चलचित्र के माध्यम से जानकारी दि जा सकती हैं उन्हे कैसे शामिल करना हैं इसके भी प्रावधान दिए गए हैं। मूलत: इसमें शामिल हैं:
- वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए उपयोग मे लाए जाने वाले संचार उपकरण,
- पहचान (Identification), तलाशी और जब्ती (Search and Seizure), या सबूत (Evidence) की प्रक्रियाओं को रिकॉर्ड करने हेतु उपयोग मे लाए जाने वाले संचार उपकरण
- इलेक्ट्रॉनिक संचार, जैसे वीडियो, फ़ाइलें, रिकॉर्डिंग इत्यादि को भेजना या प्राप्त करने हेतु उपयोग मे लाए जाने वाले उपकरण, इत्यादि।
- राज्य सरकार नियमों के माध्यम से यह तय कर सकती है कि इन उद्देश्यों के लिए कौन से अन्य तरीके या साधन शामिल किए जाएँगे। इसका अर्थ है कि परिभाषा समय के साथ नई तकनीक के साथ विकसित हो सकती है।
यह परिभाषा सुनिश्चित करती है कि कानूनी प्रक्रिया में डिजिटल वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग तथा संचार का उपयोग औपचारिक और कानूनी रूप से मान्य हो, जिससे पारदर्शिता और आधुनिकता लाई जा सके।
2.2.3 कोर्ट द्वारा विश्लेषण
CrPC की धारा 160 से 164 के अनुसार कोई भी पुलिस अधिकारी किसी भी व्यक्ति का बयान लेते समय या आरोपित अथवा संशयित व्यक्ति की जांच करते समय उस व्यक्ति का बयान एवं जांच श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन के द्वारा रिकार्ड कर सकता हैं। किसी भी आरोपित व्यक्ति का बयान अथवा अपराध-स्वीकृति CrPC धारा 164 के अनुसार मैजिस्ट्रैट के समक्ष एवं उस व्यक्ति के अधिवक्ता के समक्ष श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन के द्वारा रिकार्ड कीया जा सकता हैं।[1] इस तरह CrPC मे श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन के उपयोग के बारे मे बताया गया हैं।
जिस तरह से प्रतिदिन नए नए आधुनिक साधन विकसित हो रहे हैं उनका उपयोग जनहित मे करने हेतु कानून मे योग्य बदलाव की और यह एक सकारात्मक पहल हैं।
संदर्भ
[1] Tofan Singh vs The State Of Tamil Nadu [AIR 2020 SUPREME COURT 5592, AIRONLINE 2020 SC 798]
“श्रव्य-दृश्य इलेक्ट्रॉनिक साधन” (Audio-Video Electronic Means) की परिभाषा मे और भी अन्य उपकरणों को शामिल करने के लिए क्या केंद्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिलकर टेक्नॉलजी मे होने वाले नए नए बदलाव के अनुसार जल्द से जल्द बदलाव करने चाहिए? इस विषय पर कमेन्ट कर चर्चा शुरू करिए?
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