१५. भूमिगत नेटवर्क

इंटरनेट पर अश्लील साहित्य का प्रसार रोकने के लिए सरकार और कानूनी संस्थाएं प्रयास कर रही हैं, फिर भी अपराधियों ने तकनीक का उपयोग करके एक समांतर और गुप्त दुनिया का निर्माण किया है। इसे ही भूमिगत नेटवर्क या डिजिटल अंडरवर्ल्ड कहा जाता है। यह नेटवर्क इतना सुरक्षित और जटिल है कि वहां पहुंचना और कार्रवाई करना अत्यंत कठिन होता है। इस नेटवर्क के विभिन्न स्तरों का विस्तृत विश्लेषण नीचे दिया गया है।

१५.१ समांतर और गुप्त दुनिया

इंटरनेट का जो हिस्सा हमें गूगल या अन्य सर्च इंजन पर दिखाई देता है, वह केवल हिमशैल का एक सिरा है। उसके नीचे एक अथाह और अंधकारमय दुनिया है, जहां अनुचित साहित्य का अवैध व्यापार और वितरण चलता है। इसे ही भूमिगत नेटवर्क कहा जाता है। इस नेटवर्क में संदेश भेजने के लिए एन्क्रिप्टेड ऐप्स, गुमनाम रहने के लिए डार्क वेब और आर्थिक लेनदेन के लिए डिजिटल मुद्रा का उपयोग किया जाता है। यह दुनिया इतनी उन्नत है कि सामान्य कानून और तकनीकी प्रतिबंध वहां निष्प्रभावी हो जाते हैं। इस भूमिगत जाल के कारण अनुचित साहित्य का प्रसार केवल एक देश तक सीमित न रहकर वैश्विक बन गया है। अपराधी अपनी पहचान छिपाकर दुनिया भर के पीड़ितों का शोषण कर रहे हैं और अनुचित सामग्री का काला बाजार चला रहे हैं। इस प्रणाली के कारण समाज की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती पैदा हो गई है।[1]

१५.२ मैसेजिंग ऐप्स का अंडरवर्ल्ड: लीक हुई सामग्री के लिए समर्पित चैनल

आज के समय में टेलीग्राम, व्हाट्सएप और डिस्कॉर्ड जैसे मैसेजिंग ऐप्स का उपयोग बड़े पैमाने पर बढ़ गया है। इनमें टेलीग्राम जैसे ऐप्स अपराधियों के लिए स्वर्ग साबित हो रहे हैं, क्योंकि वहां उपयोगकर्ता की पहचान छिपाकर हजारों लोगों के समूह या चैनल बनाए जा सकते हैं। ऐसे चैनलों में बिना किसी सहमति के लीक हुई निजी तस्वीरें, वीडियो और अत्यंत विकृत अनुचित सामग्री बड़े पैमाने पर साझा की जाती है। इन चैनलों में विशिष्ट लिंक के माध्यम से ही प्रवेश मिलता है, जिससे वे सार्वजनिक नजरों से बचे रहते हैं।

इस मैसेजिंग ऐप्स के अंडरवर्ल्ड में सामग्री का वर्गीकरण किया गया होता है। वहां न केवल मुफ्त सामग्री, बल्कि प्रीमियम चैनल भी होते हैं जहां प्रवेश पाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। ऐसे चैनलों पर अक्सर महिलाओं के सोशल मीडिया प्रोफाइल से चुराई गई तस्वीरों का उपयोग करके उन्हें बदनाम किया जाता है। यह जाल इतनी तेजी से फैलता है कि एक चैनल पर प्रतिबंध लगाने के बाद भी कुछ ही मिनटों में दूसरा चैनल तैयार हो जाता है और उसके हजारों सदस्य वहां चले जाते हैं। इससे पीड़ित व्यक्ति की निजी जानकारी हमेशा के लिए इंटरनेट पर घूमती रहती है, जो उनके लिए जीवन भर की मानसिक प्रताड़ना बन जाती है।

१५.३ डार्क वेब: जहां सबसे अवैध सामग्री होती है

डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है जिसे सामान्य ब्राउज़र से नहीं देखा जा सकता। वहां जाने के लिए ‘टॉर’ (Tor) जैसे विशेष सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। डार्क वेब पर पूरी तरह से गुमनाम रहा जा सकता है, इसलिए वहां अत्यंत भयानक और अवैध अनुचित सामग्री का बाजार सजता है। इसमें मुख्य रूप से बाल यौन शोषण, मानव तस्करी से प्राप्त दृश्य और अत्यंत हिंसक सामग्री शामिल होती है। दुनिया के सबसे बड़े अपराधी रैकेट डार्क वेब से अपने व्यवहार नियंत्रित करते हैं।

डार्क वेब पर चलने वाले अनुचितता के इस बाजार को रोकना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि वहां सर्वर का पता (आईपी एड्रेस) खोजना असंभव होता है। वहां चलने वाले चैट रूम्स में अपराधी एक-दूसरे से संवाद करते हैं और नई तकनीकों का आदान-प्रदान करते हैं। यह दुनिया किसी भी कानूनी बंधन के परे है। वहां न केवल अनुचित सामग्री, बल्कि नशीले पदार्थों और हथियारों का व्यापार भी चलता है। डार्क वेब अनुचित सामग्री के जाल का वह केंद्र है जहां से इस उद्योग के लिए आवश्यक कच्चा माल यानी अवैध और गुप्त तरीके से बनाई गई सामग्री दुनिया भर में पहुंचाई जाती है।

१५.४ क्रिप्टोकरेंसी: अवैध सामग्री व्यापार की मुद्रा

अनुचित सामग्री के भूमिगत व्यापार में आर्थिक लेनदेन करने के लिए क्रिप्टोकरेंसी, विशेष रूप से बिटकॉइन या मोनेरो का उपयोग किया जाता है। पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली में लेनदेन का पीछा करना (ट्रैकिंग) आसान होता है, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी में पैसे किसने भेजे और किसे मिले, यह समझना कठिन होता है। इससे अनुचित सामग्री के ग्राहकों और विक्रेताओं दोनों को सुरक्षा कवच मिलता है। बड़ी वयस्क वेबसाइटों से लेकर टेलीग्राम चैनलों तक हर जगह क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से भुगतान लिया जाता है।[2]

आपराधिक संगठन इस डिजिटल मुद्रा का उपयोग करके मनी लॉन्ड्रिंग करते हैं। जब कोई ग्राहक प्रीमियम वयस्क सामग्री के लिए क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग करता है, तो वह लेनदेन गुप्त रहता है। इससे अपराधियों को पुलिस के जाल में फंसने का डर नहीं रहता। इस मुद्रा के कारण यह उद्योग अब किसी देश की सीमा में बंधा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चलने वाली मानव तस्करी और अनुचित सामग्री की खरीद-बिक्री के लिए यह एक सुरक्षित माध्यम बन गया है। जब तक डिजिटल मुद्रा के लेनदेन पर कड़े प्रतिबंध नहीं लगते, तब तक इस भूमिगत व्यापार पर लगाम लगाना लगभग असंभव है।

१५.५ वीपीएन (VPNs) और प्रॉक्सी: उपयोगकर्ता और अपराधी पाबंदी को कैसे बायपास करते हैं

जब सरकार किसी वयस्क वेबसाइट पर प्रतिबंध लगाती है, तो वह वेबसाइट स्थानीय आईएसपी (ISP) स्तर पर ब्लॉक कर दी जाती है। हालांकि, वीपीएन (Virtual Private Network) और प्रॉक्सी सर्वर्स का उपयोग करके इस प्रतिबंध को आसानी से दरकिनार किया जा सकता है। वीपीएन उपयोगकर्ता का लोकेशन बदलकर यह दिखाता है कि वह दूसरे देश से इंटरनेट का उपयोग कर रहा है, जहां वह वेबसाइट ब्लॉक नहीं होती। इससे अनुचित सामग्री के आदी लोग सरकार की पाबंदी की अनदेखी कर ऐसी वेबसाइटें देखते रहते हैं।

अपराधी भी अपने डिजिटल कदमों के निशान मिटाने के लिए वीपीएन का उपयोग करते हैं। इससे उनका आईपी एड्रेस लगातार बदलता रहता है, जिससे उनका मूल स्थान खोजना कठिन हो जाता है।[3] बाजार में कई मुफ्त और सशुल्क वीपीएन उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग करके अनुचित सामग्री का उपयोग और प्रसार बेधड़क जारी है। ऐसी तकनीक के कारण केवल वेबसाइटों पर प्रतिबंध लगाकर अनुचितता रोकना कठिन हो गया है। तकनीक का यह दुरुपयोग कानून के प्रवर्तन में बड़ी बाधाएं पैदा करता है और अनुचित सामग्री के जाल को और अधिक सुरक्षित बनाता है।

१५.६ हायड्रा इफेक्ट: प्रतिबंधित खाते तुरंत फिर से क्यों उग आते हैं

ग्रीक दंतकथा के हायड्रा नामक राक्षस का एक सिर काटने पर वहां दो नए सिर उग आते थे। अनुचित सामग्री की दुनिया पर भी ‘हायड्रा इफेक्ट’ लागू होता है। जब पुलिस या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कोई अनुचित चैनल, वेबसाइट या अकाउंट बंद करते हैं, तो उस जगह तुरंत कई नए चैनल शुरू हो जाते हैं। इसका मुख्य कारण इन अपराधियों के पास पहले से तैयार बैकअप डेटा और बड़ी संख्या में मौजूद सदस्य हैं। एक लिंक के माध्यम से ये सभी सदस्य कुछ ही समय में नए प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा हो जाते हैं।

इस प्रणाली में कोई एक मुख्य नेता नहीं होता, बल्कि यह नेटवर्क विकेंद्रीकृत होता है। इससे एक जगह की श्रृंखला तोड़ने पर भी पूरा जाल नष्ट नहीं होता। अनुचित सामग्री का वितरण करने वाली वेबसाइटें लगातार अपना डोमेन नेम (URL) बदलती रहती हैं, जिससे उन्हें स्थायी रूप से ब्लॉक करना कठिन होता है। इस हायड्रा इफेक्ट के कारण कानूनी संस्थाओं को लगातार नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह एक कभी न खत्म होने वाली डिजिटल लड़ाई बन गई है, जहां अपराधी तकनीक के बल पर हमेशा कानून से एक कदम आगे रहने का प्रयास करते हैं।

इसके लिए आवश्यक है कि नियम बदले जाएं, ताकि ऐसी वेबसाइटें चलाने वाले लोगों पर भारी आर्थिक दंड लगाकर उसे वसूला जा सके। २००० और ५००० रुपये के आर्थिक दंड को बहुत ही तुच्छ माना जाता है और यह है भी बहुत कम राशि – पूरी केस का निपटारा होने तक पुलिस, सरकार और कोर्ट को जो खर्च करना पड़ता है जिसे इन्फ्रास्ट्रक्चरल खर्च कहा जा सकता है, वह भी नहीं निकलता। ये लोग यह आर्थिक दंड भरकर फिर से यही काम करने के लिए स्वतंत्र होते हैं। इसलिए आवश्यक है कि साइट ओनर को भी कानून के शिकंजे में कसने के लिए प्रयास किए जाने चाहिए और जो क्रिएटर्स इससे लाखों रुपये कमाते हैं उन्हें भी इतना बड़ा आर्थिक दंड लगाया जाना चाहिए कि उनकी पूरी संपत्ति जब्त हो जाए, इसके बिना यह संभव नहीं हो पाएगा।


[1] Stefan Scharnowski, “Darkweb traffic, privacy coins, and crypto-currency trading activity”, Finance Research Letters 67 (2024) 105875

[2] Industry Trends, “The Dark Side of Cryptocurrency: How Digital Assets Fuel Money Laundering and Illicit Trades”, Analytical Insight, 19.3.2025, available at: https://www.analyticsinsight.net/white-papers/the-dark-side-of-cryptocurrency-how-digital-assets-fuel-money-laundering-and-illicit-trades, last visited on 15.12.2025

[3] “Unmasking the Mask: How Criminals’ Use of VPNs Led to Their Own Capture”, Crime Solver Central, 8.4.2025, available at: https://crimesolverscentral.com/blog/post?name=unmasking-the-mask-how-criminals-use-of-vpns-32141, last visited on 15.12.2025

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