पशु अतिचार अधिनियम, 1871: धारा 29
यह दोनों न्यायालय अक्सर तहसील अथवा जिले के नगर मे ही स्थित रहते थे। इससे न्याय मे देरी की संभावना बढ़ जाती थी। बिना वकील को नियुक्त किए ये मामले सुलझते नहीं थे। ब्रिटिश नीति ने यह सुनिश्चित किया कि वास्तविक क्षतिपूर्ति पाने का रास्ता इतना कठिन हो कि अधिकांश गरीब किसान इसे अपनाने का साहस न करें। यह एक कानूनी प्रावधान था जो केवल धनी ज़मींदारों और संपन्न वर्गों के लिए उपयोगी था जो सिविल मुकदमे का खर्च उठा सकते थे। गोरों ने बड़ी कुटिलता से स्थानीय पंचोंद्वारा विवाद सुलझाने वाली भारतीय व्यवस्था को समाप्त कर प्रदीर्घ न्यायव्यवस्था इस देश पर केवल इसीलिए लागू की, क्यू की वे चाहते ही नहीं थे की भारतीय जनता को सरलता से न्याय मिले।
