७. आर्थिक गणित और लाभ

अश्लील सामग्री का डिजिटल प्रसार केवल तकनीक पर निर्भर न होकर उसके पीछे एक विशाल आर्थिक श्रृंखला कार्यरत है। जब अनैतिकता को लाभ का साथ मिलता है, तब वह एक वैश्विक उद्योग बन जाता है। इस आर्थिक गणित के विभिन्न पहलुओं को समझना आवश्यक है। इस पूरी श्रृंखला में जितना टर्नओवर होता है, उतनी राशि यदि भारत के पास हो, तो पुलिस व्यवस्था आधुनिक हो सकती है और महिला एवं बाल कल्याण की सभी योजनाएं पूरी की जा सकती हैं।

७.१ अनैतिकता का व्यवसाय: आय के स्रोत

अनुचित सामग्री का व्यवसाय दुनिया के सबसे बड़े लाभ कमाने वाले उद्योगों में से एक है। इस आय के मुख्य स्रोत सशुल्क सदस्यता (पेड सब्सक्रिप्शन), विज्ञापन, पे-पर-व्यू (प्रति व्यू भुगतान) और डेटा की बिक्री हैं।[1] जब कोई उपयोगकर्ता मुफ्त वयस्क वेबसाइट पर जाता है, तो उससे एकत्र की गई व्यक्तिगत जानकारी और उसका ब्राउजिंग डेटा विज्ञापन कंपनियों को बेच दिया जाता है। इसके अलावा, प्रीमियम सामग्री के लिए लिया जाने वाला शुल्क सीधे प्लेटफॉर्म के मालिकों के पास जाता है। यह व्यवसाय इतना लाभ देने वाला है कि कई कंपनियां कानूनी और नैतिक जोखिम उठाकर भी इस क्षेत्र में निवेश करती हैं। संक्षेप में, मानवीय कामुकता का व्यवसायीकरण करके यह विशाल आर्थिक ढांचा खड़ा किया गया है।

७.२ सब्सक्रिप्शन मॉडल: निकटता और नग्नता की बिक्री

वर्तमान समय में ‘ओनलीफैन्स’ जैसे प्लेटफॉर्म ने सब्सक्रिप्शन मॉडल के माध्यम से अश्लीलता की परिभाषा बदल दी है। यहाँ निर्माता और ग्राहक के बीच एक आभासी ‘निकटता’ पैदा की जाती है। उपयोगकर्ता अपने पसंदीदा निर्माता के निजी या नग्न चित्र देखने के लिए हर महीने एक निश्चित राशि देते हैं। यह मॉडल निर्माता को सीधे पैसे दिलाता है, जबकि प्लेटफॉर्म उसमें से २० से ५० प्रतिशत हिस्सा कमीशन के रूप में अपने पास रखता है। निकटता और विशिष्टता का भ्रम पैदा करके ग्राहकों से अधिक पैसे वसूले जाते हैं। इससे नग्नता एक वस्तु बन गई है, जिसकी कीमत मांग और आपूर्ति के अनुसार तय होती है। यह मॉडल निर्माताओं को और अधिक स्पष्ट तथा भड़काऊ होने के लिए निरंतर प्रोत्साहित करता है, क्योंकि इसके बिना उनकी आय बनी नहीं रहती।[2]

७.३ विज्ञापन राजस्व का विरोधाभास

कई प्रतिष्ठित ब्रांड दावा करते हैं कि वे अनुचित सामग्री का समर्थन नहीं करते, लेकिन डिजिटल विज्ञापनों की जटिल प्रणाली (प्रोग्रामेटिक एडवरटाइजिंग) के कारण अक्सर ये ब्रांड अनजाने में ऐसी सामग्री को वित्तपोषित कर देते हैं। विज्ञापन देने वाली कंपनी को अक्सर यह पता नहीं होता कि उनका विज्ञापन वास्तव में किस वेबसाइट या वीडियो पर दिख रहा है। एल्गोरिदम केवल ‘ट्रैफिक’ और ‘आईबॉल्स’ (दर्शकों की संख्या) देखता है। अनुचित सामग्री को भारी मात्रा में ट्रैफिक मिलने के कारण ब्रांड्स को वहां विज्ञापन देना फायदेमंद लगता है।[3] कई बार छोटी कंपनियां जानबूझकर ऐसे प्लेटफॉर्म चुनती हैं क्योंकि वहां विज्ञापन की दरें कम होती हैं और पहुंच अधिक होती है। यह विरोधाभास अनुचित सामग्री की अर्थव्यवस्था को छिपी हुई ताकत देता है।

७.४ इन्फ्लुएंसर अर्थव्यवस्था और भड़काऊपन का दबाव

आज की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अर्थव्यवस्था में टिके रहने के लिए निर्माताओं पर भड़काऊ होने का भारी दबाव होता है। अधिक स्पॉन्सरशिप प्राप्त करने के लिए फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाना आवश्यक होता है और अनुचितता की सीमा रेखा पर स्थित कंटेंट तेजी से फॉलोअर्स दिलाता है। इसके कारण कई इन्फ्लुएंसर शुरुआत में साधारण विषयों पर कंटेंट बनाते हैं, लेकिन बाद में अधिक से अधिक ब्रांड डील्स पाने के लिए धीरे-धीरे अनुचितता की ओर मुड़ जाते हैं। भड़काऊ कपड़े या द्विअर्थी संवादों के उपयोग से मिलने वाली ‘रीच’ उन्हें आर्थिक स्थिरता देती है। इस प्रकार, ब्रांड और स्पॉन्सर्स अनजाने में निर्माताओं को अपना सामाजिक और नैतिक स्तर गिराने के लिए मजबूर करते हैं, क्योंकि बाजार में केवल आंकड़ों को महत्व दिया जाता है।[4]

७.५ काले बाजार का अर्थशास्त्र: चोरी की गई सामग्री की बिक्री

अनुचितता के आधिकारिक व्यवसाय के साथ-साथ एक बड़ा काला बाजार (ब्लैक मार्केट) भी अस्तित्व में है। इसमें चोरी की गई अनुचित सामग्री, लीक हुए निजी वीडियो और प्रतिबंधित सामग्री की अवैध बिक्री की जाती है। टेलीग्राम और डार्क वेब जैसे माध्यमों से ऐसी सामग्री का लेनदेन होता है। अक्सर प्रीमियम सब्सक्रिप्शन वाली सामग्री चुराकर उसे कम दाम में ‘पायरेटेड’ रूप में बेचा जाता है। साथ ही, बिना सहमति वाले वीडियो (रिवेंज पोर्न) बेचकर बड़े पैमाने पर पैसे कमाए जाते हैं।[5] यह काला बाजार न केवल अनैतिक है, बल्कि यह आपराधिक जगत से भी जुड़ा होता है। चोरी की गई सामग्री की यह बिक्री पीड़ित व्यक्ति का जीवन नष्ट कर देती है और अनुचितता के शोषक चक्र को और मजबूत करती है।

इस पूरे व्यवसाय में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सब्सक्रिप्शन खरीदने के लिए ऑनलाइन ट्रांसफर करना पड़ता है जिसका रिकॉर्ड बैंक स्टेटमेंट में आता है। प्लेटफॉर्म जब क्रिएटर्स को पैसे देते हैं, वह भी ऑनलाइन ट्रांसफर से किया जाता है और उसका भी रिकॉर्ड स्टेटमेंट में आता है। आतंकवाद रोकने के लिए अक्सर कुछ बैंक खातों पर नजर रखने के लिए उन्हें चिन्हित किया जाता है, वैसा इस मामले में भी सरकार कर सकती है, लेकिन क्यों यह नहीं किया जा रहा है?


[1] Research and Markets, “Adult Entertainment Global Business Analysis Report 2024-2030 Growth of Subscription-based Models and Premium Content Sustains Revenue, Collaborations Enhance Market Visibility” Yahoo Market, Dt. 5.7.2025, available at: https://finance.yahoo.com/news/adult-entertainment-global-business-analysis-085000372.html, last visited on 7.12.2025

[2] Ajitesh Singh, “The OnlyFans Conundrum: Understanding the Intersection of Privacy, Morality, and Digital Expression in Indian Law”, International Journal of Law Management & Humanities [ISSN 2581-5369] Volume 7 Issue 6 2024

[3] Yuexin Wang, “The Regulation of Pop-up ads with Obscene Content”, Transactions on Social Science, Education and Humanities Research, ISSN: 2960-1770, eISSN: 2960-2262, Volume 12 LHPPR 2024

[4] Rahul Singh, “OBSCENITY AND MEDIA”, Indian Journal of Integrated Research in Law Volume II Issue IV, ISSN: 2583-0538

[5] “Handling Cases of Revenge Porn Standard Operating Procedures”, Unisef, September 2022

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